إلاهي فقيــرا وقفت ببــابك *** ولذت ذليــلا بعز جنابــك

أتيت مقــرا أبــوء بوزري *** فلا تحجبني بنــور جـلالك

عصيت بجـهل وعلم مصـرا *** واتبعت نفسي شـرار المـهالك

عمرت بإثم نهـاري وليــلي *** وظلمي يحـاذي عنان سمـائك

إلاهي فروحي تـروم عـلاك *** تخـوض بعزم غمار نــوالك

تريــد بشـوق تلبي نــداك *** وطيـني يسد عليها المســالك

فكدت ليـأسي أجـافي رياضا *** ملاها رجــائي بعفو جمـالك

فجاء البشير: “تعـالوا عبادي، *** فلـوذوا ببـابي” فلذت ببــابك